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Friday, December 10, 2010

जब तक पुरूष वर्ग "नारी" को माँ, बहन, दीदी, मौसी, चाची कहता है तब तक फ़ोकट में तनाव पैदा मत करो 'जी'





नारी ब्लॉग पर नज़र पड़ी तो रचना 'जी' की एक पूर्णतः पूर्वाग्रहग्रसित

परेशान पोस्ट इस सवाल पर टसुए बहाती दिखी
कि 50-55 वर्ष के पुरूष

ब्लोगर अपनी हम उम्र नारी ब्लोगर को 'माँ' क्यों कह देते हैं ? 'जी' उस

पोस्ट में महिलाओं को प्रेरित कर रही थी कि वे भी पुरूषों को दादा,

नाना, पिता इत्यादि सम्बोधन दिया करे.....ऐसा कुछ अजीब सा मसला

था जिस पर टिप्पणी देना अपना परम पुनीत दायित्व समझ कर मैंने

ये टिप्पणी की थी :


"किसी 50 -55 साल के पुरूष ने किसी हम उम्र महिला को माँ कहा हो, अभी तक ऐसा बेवकूफ़ाना उदाहरणहमारी आँखों ने तो नहीं देखा है, आपने कहीं देखा हो, तो पहले हमें दिखाइए.......फिर पोस्ट बनाइये ...यों कोरीकल्पनाओं के घोड़े दौड़ा कर फोकट का तमाशा बनाइये .

वैसे भी माँ और बहन दो ऐसे सम्मानित सम्बोधन हैं जो निर्विवाद हैं, इन पर भी विवाद खड़ा करके नारी कीगरिमा पर कोई सवाल अंकित मत करो...........भगवान के लिए मातृशक्ति का भाल कलंकित मत करो"


यह टिप्पणी 'जी' को पसन्द नहीं आई होगी इसलिए उन्होंने नहीं लगाई

अब नहीं लगाई तो नहीं लगाई, ब्लॉग उनका - मर्ज़ी उनकी........परन्तु ये

अखाड़ा अपना है इसलिए अपन ने यहीं पे चिपकादी ताकि इतनी मेहनत

से लिखी गई पंक्तियाँ बेकार जाएँ


अब आता हूँ मुद्दे की बात पर.............तो ऐसा है 'जी' कि भारतीय पुरूष

"माँ" शब्द का प्रयोग एक सम्मान सूचक के रूप में करता है बकौल

गोस्वामी तुलसीदास "पर धन पत्थर जानिये, पर तिरिया मातु
समान"

हालाँकि तुलसीदास के चक्कर में किसी पराई स्त्री को माँ समान

समझना हमारे लिए बड़ा जोखिम का काम है, इससे पिताजी का चरित्र

ख़राब होने का रास्ता खुल जाता है, लेकिन ये रिस्क लेकर भी हम

पराई नारी को माँ के दर्जे से वंचित नहीं करते क्योंकि हमें सिखाया

ही गया है कि मादा को मादा नहीं माँ के सम्बोधन से नवाजो........जैसे

गाय माँ, तुलसी माँ, विद्या माँ, गंगा माँ, यमुना माँ, प्रकृति माँ, लक्ष्मी

माँ, दादी माँ, नानी माँ, छोटी माँ, बड़ी माँ, मुन्ने की माँ, गुड्डू की माँ,

धरती माँ, भारत माँ, यहाँ तक कि चेचक जैसी बीमारी भी शीतला माँ,

माता इत्यादि


हालांकि माँ कह देने से कोई माँ नहीं हो जाती है जैसे हरियाणा में हर

आदमी ख़ुद को ताऊ समझता है और कहलाता भी है परन्तु वो ताऊ

नहीं हो जाता, 80-80 साल की बुढ़िया भी बंगाल टाइगर सौरव गांगुली

को "दादा" कहती हैं परन्तु वो सचमुच दादा नहीं होता, 90 साल का

बूढ़ा बाबा भी अस्पताल में नर्स को " सिस्टर" ही कहता है लेकिन वो

सिस्टर नहीं होती, कुँवारी जयललिता को भी सब लोग अम्मा ही

कहते हैं पर वो अम्मा नहीं है, महाराष्ट्र में हर आदमी "भाऊ" कहलाता

है पर वो भाई नहीं है, मुझे मेरी उम्र की लड़कियां "अंकल" कहती हैं तो

मैं बुरा नहीं मानता वगैरा वगैरा



लिहाज़ा जब तक पुरूष वर्ग "नारी" को माँ, बहन, दीदी, मौसी, चाची

कहता है तब तक फ़ोकट में तनाव पैदा मत करो 'जी' हाँ..........जब

कोई आपको भाभी, साली, घरवाली, जानेमन, सुन्दरी, डार्लिंग, मुन्नी

और शीला जैसे मांसल सम्बोधन देने लगे उस दिन चिन्ता का विषय

होगा


यह पोस्ट अधूरी है क्योंकि समय की मारामार है, अगर ज़रूरत पड़ी तो

इसके बाद भी लिखा जा सकता है पार्ट -2 में..........रुकावट के लिए

खेद है 'जी' !


सदैव विनम्र

-अलबेला खत्री



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